May 20, 2024

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मेवाड़ के रिकार्डवीर डॉ.अरविंदर सिंह ने हिम्मत के पंखों से पांच हजार फीट ऊंचे जटिल शिखर पर पंहुच हांसिल किया एक और कीर्तिमान

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रिपोर्ट -फैजान -ए- मोईन

भले ही 80 प्रतिशत विकलांगता मेरी दुश्मन हो जाए, पैरों से नहीं हिम्मत के पंखों से उड़ता जाउंगा मैं और इसी हिम्मत के बुते पर कई रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले अर्थ गु्रप के सीईओ डॉ. अरविंदर सिंह ने एक और कीर्तीमान हांसिल करते हुए अपनी अपंगता को करारी शिकस्त दी है।

जहां पर पंहुच पाना एक शारीरिक तंदरूस्त, बलवान शख्स के लिए भी काफी मुश्किल होता है कई तो शुरूआत में ही हिम्मत हार जाते हैं उस खारदुंगला दर्रे के दुर्गम इलाके को मोटरसाईकिल से पार कर श्री सिंह ने बड़ी मिसाल पेश की है। अरविंदर सिंह की इस हिम्मत को देखकर महसूस होता है कि अगर किसी मंजिल तक पंहुचने के लिए पूरी शिद्दत से लग जाओ तो पूरी कायनात आपके साथ हो जाती है। आपको बता देकि खारदुंगला, जम्मू और कश्मीर के लद्धाख क्षेत्र में स्थित एक ऊंचा पहाड़ी दर्रा है, जो विश्व स्तर पर सबसे ऊंचे मोटर शिखर में से एक है।

जो 5359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां के दुगर्म रास्ते कड़ाके की ठण्ड तथा ऑक्सीजन की कमी किसी भी व्यक्ति के लिए एक भीषण चुनौती है, उस पर 80 प्रतिशत विकलांगता की शारीरिक जटिलताओं को लिए अरविंदर सिंह ने जब यह किर्तीमान हांसिल किया तो हर कोई यह उनके अदम्य साहस को सलाम करने लग गया।

इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को बनाने के बाद डॉक्टर अरविंदर सिंह का लद्दाक के राज्य पाल डॉ बीडी मिश्रा ने विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्रदान किया और ट्वीट कर बधाई भी दी। उन्हें लेह लद्दाख में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीडी नेत्य, चीफ एक्जिक्यूटिव काउंसर ताशिफ, एक्जिक्यूटिव काउंसलर गुलाम मेहरी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नुरजीन अंगमू ने भी बधाई दी।

डॉ. अरविंदर ने बताया कि उन्होंने यह यात्रा 13 जुलाई को शुरू की जिसमें आने जाने में सात घण्टे का समय लगा, 42 किलोमीटर दूरी वाला यात्रा मार्ग पांच हजार मीटर फीट उचाई पर है उनका कहना की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत जीत नहीं है बल्कि पूरे दिव्यांग वर्ग के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है।

जो नकारात्मकता की विचारधारा को तोड़कर सम्भावनाओं में विश्वास करते हैं। इस रिकॉर्ड से पहले अरविंदर सिंह ने एकेडमिक एक्सीलेंस का अनूठा विश्व रिकॉर्ड बनाया था, सिंह को 123 डिग्रियां, डिप्लोमा और सर्टिफिकट हांसिल करने का गौरव प्राप्त है।