हिन्दुस्तान जिंक की बड़ी उपलब्धि, वैश्विक ESG मानकों पर खरा उतरा राजस्थान का प्लांट
चित्तौड़गढ़/उदयपुर। Hindustan Zinc Limited ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर को अंतरराष्ट्रीय ‘जिंक मार्क’ प्रमाणन दिलाया है। यह भारत का पहला प्लांट बन गया है जिसे ‘कॉपर मार्क एश्योरेंस प्रोसेस’ के तहत जिंक मार्क के मानकों पर खरा पाया गया है।
‘जिंक मार्क’ एक वैश्विक स्तर का प्रमाणन है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई औद्योगिक प्लांट पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (ESG) के कड़े मानकों का पालन कर रहा है या नहीं। इसमें कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा दक्षता, जल प्रबंधन, कचरा निपटान, कर्मचारियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों के सम्मान जैसे अहम पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
चंदेरिया स्मेल्टर का यह प्रमाणन ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में जिम्मेदारी और सतत तरीके से धातु उत्पादन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस उपलब्धि से हिन्दुस्तान जिंक की वैश्विक साख और मजबूत हुई है।
इस मौके पर कंपनी के सीईओ Arun Misra ने कहा कि ‘जिंक मार्क’ केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है। उन्होंने कहा कि कंपनी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ मेटल उत्पादन की नई परिभाषा गढ़ रही है और भारत को सस्टेनेबल मेटल सप्लायर के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कॉपर मार्क और जिंक मार्क फ्रेमवर्क बहु-हितधारक दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जो जिम्मेदार उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। इसके तहत प्रमाणित प्लांट न केवल संचालन में उत्कृष्टता दिखाते हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव भी सुनिश्चित करते हैं।
गौरतलब है कि हिन्दुस्तान जिंक को हाल ही में एसएंडपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में लगातार तीसरे साल दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला है। कंपनी का फोकस कार्बन उत्सर्जन कम करने, जल संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने पर लगातार बना हुआ है।
यह उपलब्धि न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।
