डिजिटल, रेडियो और ग्राउंड कैंपेन के जरिए लोगों को जंग से बचाव के उपायों के लिए किया जा रहा जागरूक
उदयपुर। Hindustan Zinc Limited ने वर्ष 2026 में अपने प्रमुख जन-जागरूकता अभियान ‘जंग के खिलाफ जिंक’ का देशव्यापी विस्तार शुरू कर दिया है। इस अभियान का उद्देश्य जंग (कोरोशन) को केवल औद्योगिक समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़ी घरेलू समस्या के रूप में प्रस्तुत करना और उससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है।
‘वर्ल्ड कोर्रोशन अवेयरनेस डे’ के अवसर पर केंद्रित इस पहल के तहत बताया जा रहा है कि भारत में गर्मी, उमस और प्रदूषण के कारण जंग लगने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे देश की जीडीपी को लगभग 5 प्रतिशत तक का नुकसान होने का अनुमान है। ऐसे में जंग से बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।
अभियान के तहत डिजिटल और उपभोक्ता जुड़ाव पर विशेष फोकस किया गया है। इसके लिए एचजेडएलइंडिया डॉट कॉम पर ‘जिंक गैल्वेनाइजेशन इंफॉर्मेशन हब’ शुरू किया गया है, जहां उपभोक्ता, उद्योग और नीति-निर्माता जंग से बचाव और जिंक गैल्वेनाइजेशन के फायदों के बारे में विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।
रेडियो और डिजिटल माध्यमों के जरिए भी इस अभियान को गति दी जा रही है। मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में रेडियो जिंगल्स के माध्यम से खासकर वाहन मालिकों को जंग से होने वाले नुकसान के प्रति सतर्क किया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी जिंक की उपयोगिता को ऑटोमोबाइल, घरेलू फिटिंग, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर में उसकी भूमिका के जरिए दर्शाया जा रहा है।
अभियान के तहत ग्राउंड स्तर पर भी लोगों की राय जानने के लिए सर्वे किए गए, जिनसे सामने आया कि लोग जंग को गंभीर समस्या तो मानते हैं, लेकिन इसके बचाव के तरीकों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।
इस पहल पर कंपनी के सीईओ Arun Misra ने कहा कि जंग हर व्यक्ति को प्रभावित करती है—चाहे वह वाहन हो, घर हो या सार्वजनिक ढांचा। ‘जंग के खिलाफ जिंक’ अभियान का उद्देश्य लोगों को इसके दीर्घकालिक प्रभाव और आसान बचाव उपायों के बारे में जागरूक कर कार्रवाई के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि जिंक गैल्वेनाइजेशन एक सस्टेनेबल और प्रभावी समाधान है, जो धातुओं को जंग से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अभियान के जरिए कंपनी का लक्ष्य इस जानकारी को देश के हर नागरिक तक पहुंचाना है।
यह अभियान उपभोक्ताओं, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और जंग से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
