May 24, 2024

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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा मरूधर केसरी मिश्रीमल जी म.सा. एवं रूपमुनि रजत महाराज की जन्म जयन्ती का विशाल आयोजन हुआ

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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा 30 अगस्त को सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में सुकुन मुनि जी महाराज के संघ सानिध्य में मरूधर केसरी मिश्रीमल जी म.सा. एवं रूपमुनि रजत महाराज की जन्म जयन्ती का विशाल आयोजन हुआ जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 1000 से ज्यादा श्रावकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामहिम असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, अति विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कैसी बोकाडिया, आनंदमल छल्लानी, एडवोकेट सुंदरलाल मांडावत, अशोक कोठारी, चंद्र प्रकाश तालेडा, नरेश बोहरा, अनिल पुनरिया, कालू लाल तातेड, सकल जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत थे। इनके साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत, उदयपुर की पूर्व मेयर रजनी डांगी एवं समाजसेवी व कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ भी विशेष रूप से उपस्थित थे।


आयोजन का प्रारम्भ ध्वजारोहण एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। स्वागत अध्यक्ष एडवोकेट सुंदरलाल मांडावत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि आज अत्यंत हर्ष का विषय है कि इतना बड़ा ऐतिहासिक आयोजन मेवाड़ की पवित्र धरा उदयपुर में हो रहा है। उन्होंने देश भर से इस आयोजन में भाग लेने आए श्रावकों का आभार व्यक्त किया। सुरेश नागौरी ने अपने उद्बोधन में कहां की हमारे पूजनीय मिश्रीमल जी महाराज की 133 की जयंती एवं लोकमान्य संत रूप मुनि जी महाराज के 96वी जयंती का गुणगान करने का हमें अवसर मिला। यह हमारे लिए परम सौभाग्य की बात है।
इस अवसर पर सुकुन मुनि जी महाराज ने लोकमान्य संत शेरे राजस्थान अहिंसा दिवाकर श्री रूपचंद जी महाराज रजत एवं श्रमण सूर्य दिव्य विभूति भारत भूषण श्रमण संघीय गुरुदेव मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी महाराज साहब का संक्षिप्त जीवन परिचय दिया।
महाराज श्री ने कहा कि श्री रूपचंद जी महाराज साहब रजत का जन्म विक्रम संवत 1986 श्रावण सुद दसम दिनांक 14 अगस्त 1929 बुधवार को नाडोल जिला पाली में हुआ। माता का नाम श्रीमती मोती भाई चौहान एवं पिता का नाम भैरूपुरी जी चौहान था। जाति से वे गोस्वामी थे। उनका सांसारिक नाम रूप पूरी था। उन्होंने विक्रम संवत 1999 सन 1938 बाल्यकाल से ही वैराग्य धारण किया एवं उनकी दीक्षा विक्रम संवत 1999 माघ सुद 13 शुक्रवार दिनांक 30 जनवरी 1942 को जोधपुर में हुई। उनके दादा गुरु श्री संतोष चंद जी महाराज थे जबकि दीक्षा गुरु शांत मूर्ति कविवर्य स्वामी जी श्री मोतीलाल जी महाराज साहब एवं उनके शिक्षा गुरु मरुधर केसरी श्रवण सूर्य प्रवर्तक श्री मिश्रीमल जी महाराज साहब थे। उनका विहार क्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान दिल्ली पंजाब महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश तमिलनाडु कर्नाटक मध्य प्रदेश गुजरात हरियाणा उत्तर प्रदेश एवं उत्तरांचल रहे।
मुनि श्री ने कहा कि श्री मिश्रीमल जी महाराज साहब का जीवन परिचय देते हुए महाराज श्री ने कहा कि आपका जन्म विक्रम संवत 1948 श्रावण सूत्द 14 मंगलवार दिनांक 18 अगस्त 1891 में हुआ। आपका जन्म स्थान पाली मारवाड़ था। पिता का नाम श्री शेषमल जी सोलंकी एवं माता का नाम श्रीमती केसर कंवर था।जाती ओसवाल सोलंकी मेहता। सांसारिक नाम मिश्रीमल था।उन्होंने वैराग्य का धारण विक्रम संवत 1969 अक्षय तृतीया 20 अप्रैल 1912 को किया। उनकी दीक्षा विक्रम संवत 1975 अक्षय तृतीया सोमवार दिनांक 13 जून 1918 सोजत सिटी में हुई।उनके दादा गुरु स्वामी जी श्रीमानमल जी महाराज साहब, गुरु स्वामी जी श्री बुद्धमल जी महाराज साहब थे। आपका विहार क्षेत्र मुख्यतः राजस्थान के पाली जोधपुर अजमेर जिले में रहा। अआपने इन जिलों में करीब 65 चातुर्मास किये।


महाराज श्री ने बताया कि देश की स्वतंत्रता में आपका विशेष योगदान रहा है। देश के स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी जी से ब्यावर में, नेहरू जी से सोजत रोड में व सरदार वल्लभभाई पटेल से मिलना व परामर्श के साथ स्वतंत्रता सेनानियों में जय नारायण व्यास दामोदर व्यास मथुरा दास माथुर आदि को संरक्षण देना और स्वतंत्रता के लिए उनको प्रोत्साहन देना रहा।
साध्वी श्री हर्ष प्रभा जी ने दोनों महान संतों के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहां कि हमें उनके गुणों को जीवन में उतारने की जरूरत है। हमें उन महान विभूतियों के चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए। वरुण मुनि जी ने कहा कि दोनों महान विभूतियों ने आजीवन संयम को धारण किया और अपने तप के बल पर वह जन जन की श्रद्धा के केंद्र बने। अमृत मुनि जी महाराज ने अपनी अमृतवाणी से सभी को धर्म प्रभावना करते हुए कहा कि हमारे महान गुरुजनों का चरित्र देश ही नहीं दुनिया को प्रेरणा देने वाला है। उन जैसी महान विभूतियां सदियों सदियों में बिरली ही होती है। मुनि श्री महाश्रमण जी ने भी दोनों चरित्र आत्माओं के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सभी श्रावकों से अपील की वह उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त करें।


समारोह को संबोधित करते हुए असम के राज्यपाल महामहिम गुलाबचंद कटारिया ने कहां की यह उदयपुर का सौभाग्य है कि दोनों ही महान संतों की जयंती उदयपुर में मनाई जा रही है। हमारे संत भगवान हमेशा हमारे पूजनीय रहे हैं क्योंकि यह भगवान महावीर की परंपरा को आज भी निरंतर आगे बढ़ाने का उपक्रम कर रहे हैं। गुरूजन अपने दिव्य ज्ञान और दिव्य देशना से समाज को हमेशा लाभिन्वत करते रहते हैं। संतों की दिव्या देशना से आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।
महामहिम कटारिया ने इस दौरान सभी को अनुशासन और समय की महत्वता का पाठ पढ़ाते हुए कहां कि कोई भी आयोजन या कार्यक्रम हो उसमें समय की महत्ता बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। आयोजन समय पर प्रारंभ करना और समय पर खत्म करना यह आयोजकों की जिम्मेदारी होती है। किसी भी आयोजन में नेताओं को हमेशा उलालाना मिलती है की नेता है देरी से आते हैं जल्दी चले जाते हैं। लेकिन यह आयोजकों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह आयोजन की समय सीमा का हमेशा ध्यान रखें। राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने भी अपने विचार रखें। सुकुन मुनि जी महाराज के मंगल आशीष के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कैसी बोकड़िया ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर मुनि श्री का आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट रोशन जैन ने किया।


आयोजन में कोटडा से आए समाज जनों एवं सोजत सिटी से आए श्रीसंघ के सदस्यों ने सुकुन मुनि जी महाराज से चातुर्मास की विनती की।