May 6, 2026

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“बच्चों के नहीं, माता-पिता के लिए भी खुलें स्कूल” — लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का अनोखा नजरिया 🎙️

उदयपुर। Lakshyaraj Singh Mewar ने शिक्षा और पेरेंटिंग को लेकर एक अलग और सोचने पर मजबूर करने वाला नजरिया पेश किया है। India’s International Movement to Unite Nations (I.I.M.U.N) के पॉडकास्ट “Before I Became Me” में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि माता-पिता को भी सीखने की जरूरत है।

पॉडकास्ट के होस्ट Rishabh Shah के साथ बातचीत में मेवाड़ ने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा,
“लोग कहते हैं स्कूल बच्चों के लिए खुलने चाहिए, लेकिन आज जरूरत है कि स्कूल माता-पिता के लिए भी खुलें… उन्हें भी दो घंटे स्कूल जाना चाहिए।”

उन्होंने बदलते समय में “रिवर्स लर्निंग” यानी बच्चों से सीखने की अवधारणा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना है कि आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में सीखने की प्रक्रिया एकतरफा नहीं रही, बल्कि अब यह दोनों दिशाओं में बहती है—खासकर परिवार के भीतर।

अपने अनुभव साझा करते हुए मेवाड़ ने कहा कि पहले की पीढ़ियां पेरेंटिंग को ज्यादा समझदारी से निभाती थीं, लेकिन आज कई माता-पिता इस भूमिका में असमंजस में नजर आते हैं। ऐसे में मेंटरिंग और संवाद की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अपने बच्चों को ही अपना “गुरु” बताया। उन्होंने कहा,
“पहले मेरे ऊपर मेरे माता-पिता थे, और अब मेरे साथ मेरे बच्चे हैं, जो मेरे लिए एक नई तरह के मार्गदर्शक बन गए हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सोच और भाषा को समझने के लिए अधिकार नहीं, बल्कि धैर्य और जुड़ाव की जरूरत होती है।

मेवाड़ का यह दृष्टिकोण न केवल आधुनिक पेरेंटिंग को नई दिशा देता है, बल्कि समाज में शिक्षा की बदलती परिभाषा को भी उजागर करता है।