March 6, 2026

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राजस्थान की मननिय उपमुख्यमंत्री, श्रीमती दीया कुमारी ने किया नंद घर के प्रोजेक्ट 'बालवर्धन' का शुभारंभ; बच्चों के पोषण और...

पेटीएम मनी ने निवेशकों के लिए सस्ती और सुलभ ट्रेडिंग को बढ़ावा देने हेतु पे लेटर (एमटीएफ) के लिए ब्याज...

विश्व संक्षारण जागरूकता दिवस से पूर्व हिंदुस्तान जिंक ने सप्ताह में जंग के खिलाफ अभियान शुरू किया जंग से भारत को सालाना जीडीपी का लगभग 5 प्रतिशत नुकसान उदयपुर, 23 अप्रैल 2025। विश्व संक्षारण जागरूकता से पहले, भारत की एकमात्र और दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक, हिन्दुस्तान जिं़क लिमिटेड, ने जंग और इसके व्यापक प्रभाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अपने अभियान जंग के खिलाफ जिं़क के तहत कई प्रभावशाली पहल शुरू कीं। यह अभियान जंग के बारे में जागरूकता है, जो एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसकी वजह से भारत को सालाना अपनी जीडीपी का लगभग 5 प्रतिशत नुकसान होता है, जो कि रोके जा सकने वाले नुकसान के रूप में 100 बिलियन डॉलर से अधिक है। जंग, एक प्राकृतिक लेकिन निरंतर प्रक्रिया है, जो नमी, ऑक्सीजन, प्रदूषकों और लवणों के कारण होने वाली रासायनिक और विद्युत रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से धातुओं को खराब करती है। इससे संरचनात्मक क्षति में तेजी आती है और बुनियादी ढांचे और वाहन बॉडी जैसी प्रमुख संपत्तियों को नुकसान होता है। जिं़क गैल्वनाइजेशन कारगर, स्केलेबल समाधान है जो धातु के जीवन और प्रदर्शन को बढ़ाने वाले सुरक्षात्मक अवरोध का निर्माण कर ऐसे नुकसानों को रोकता है। अभियान के तहत् दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत जिं़क उत्पादक कंपनी ने सहित एक सप्ताह तक सोशल मीडिया आउटरीच, ऑन-ग्राउंड प्रदर्शन और एक राष्ट्रव्यापी उपभोक्ता सर्वेक्षण शुरू किया। कंपनी के प्रयासों का उद्देश्य गैल्वनाइज्ड स्टील के उपयोग को बढ़ावा देने की जानकारी से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और निजी संपत्तियों के लिए दीर्घकालिक, लागत प्रभावी सुरक्षा को बढ़ावा देना है जो कि स्टेनलेस स्टील जैसी महंगी सामग्रियों का सस्ता और , अत्यधिक मजबूत विकल्प है। ऑटोमोटिव क्षेत्र में ग्राहकों की जागरूकता बढ़ाने के लिए, हिंदुस्तान जिंक ने 21 से 24 अप्रैल तक जिंक सिटी, उदयपुर के प्रमुख स्थानों पर लाइव प्रदर्शन किया, जो कि 2,500 से अधिक वर्षों से जिंक की विरासत वाला शहर है। प्रदर्शन के तहत् एक गैल्वेनाइज्ड और एक गैर-गैल्वेनाइज्ड दो दोपहिया वाहनांे को एक को एक साथ रखा गया था। जिनमें स्पष्ट अंतर था, गैर-गैल्वेनाइज्ड दोपहिया वाहन में जंग दिखाई दे रहा था, जबकि गैल्वेनाइज्ड दोपहिया वाहन जिं़क कोटिंग से सुरक्षित था। इस सार्वजनिक प्रयोग ने लोगो में जिज्ञासा प्रकट की, जिंक-स्मार्ट निर्णयों को बढ़ावा देने के लिए उस समय की प्रतिक्रियाएं कैप्चर की गईं। प्रदर्शन में युवाओं, व्यवसाय मालिकों और आम जनता को लक्षित किया गया था। इस पहल पर टिप्पणी करते हुए, हिन्दुस्तान जिं़क लिमिटेड के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि जंग बुनियादी ढांचे और देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। हिन्दुस्तान में, हम मानते हैं कि जागरूकता वास्तविक बदलाव की दिशा में पहला कदम है। जबकि निर्माताओं के लिए गैल्वनाइजेशन को अपनाना आवश्यक है, उपभोक्ता भी सही सवाल पूछकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं - खासकर जब बात घरों और वाहनों जैसे दीर्घकालिक निवेशों की हो। जंग के खिलाफ जिं़क के माध्यम से, हम उद्योगों और व्यक्तियों को जिंक सुरक्षा के महत्वपूर्ण मूल्य के बारे में शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व संक्षारण जागरूकता दिवस विश्व संक्षारण संगठन द्वारा जंग की भारी आर्थिक और पर्यावरणीय लागत को उजागर करने के लिए एक पहल है। वैश्विक स्तर पर, जंग के कारण 2.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है, या औद्योगिक देशों के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3 से 4 प्रतिशत होता है। भारत में 7,800 किलोमीटर की तटरेखा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में जंग का अधिक खतरा है। हालाँकि, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने जंग से संबंधित सकल घरेलू उत्पाद के नुकसान को केवल 1.5 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जिसका मुख्य कारण जिंक-लेपित स्टील का व्यापक उपयोग है। अध्ययनों से पता चलता है कि उचित रोकथाम रणनीतियों के साथ जंग से संबंधित नुकसान के 30 प्रतिशत तक से बचा जा सकता है। सामाजिक प्रयोग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह से वाहन के 70 प्रतिशत से अधिक भाग में स्टील होता है, जो बिना सुरक्षा के आसानी से जंग खा जाता है। ऑटोमोटिव क्षेत्र में, भारतीय वाहन निर्माता बॉडी-इन-व्हाइट , वाहन और उसके घटकों ...

गोगुंदा। भारत सरकार के केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के गोगुंदा आगमन पर टोल प्लाजा पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित...

प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को मनाया जाने वाला वर्ल्ड बुक डे, किताबों और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने का...

एचसीएल जिगसॉ से अब तक 2 लाख से अधिक छात्र जुड़ चुके हैंफाइनलिस्ट्स को मिलेगा कुल 12 लाख रुपए की...

जयपुर 21 अप्रैल 2025।  सोशल मीडिया के माध्यम से वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने राजस्थान की विशाल अप्रयुक्त खनिज संपदा पर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य की आर्थिक क्षमता को और अधिक बढ़ाने के लिए औद्योगिक विकास में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। जीडीपी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राजस्थान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों से क्यों पीछे है, जबकि इन सभी राज्यों की जीडीपी 300 बिलियन डॉलर से अधिक है। यह ऐसे समय में, जब राजस्थान 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। हालिया अनुमानों के अनुसार, 196 बिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ, राजस्थान औद्योगिक विकास के मामले में अपने समकक्ष राज्यों से पीछे है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में वेदांता के चेयरमैन ने कहा कि राजस्थान की धरती में अपार संपदा है, आॅयल एण्ड गैस, स्टोन, तांबा, चांदी, सोना, जिं़क,पोटाश, रॉक फॉस्फेट ऐसे तत्व है जो राज्य के लिए समृद्धि की नई लहर ला सकते हैं। राज्य में देश के सबसे समृद्ध और व्यापक प्राकृतिक संसाधन भंडार हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम इस प्राकृतिक खजाने का पूरा उपयोग करते हैं तो राजस्थान की जीडीपी और राजस्व आसमान छू सकते हैं। अनगिनत रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं एवं व्यापक समृद्धि आ सकती है। स्पष्ट रूप से जरूरत इस बात की है कि धरती के नीचे छिपे प्राकृतिक खजानों का पूर्ण उपयोग और खनिजों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए हजारों विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित की जाएँ। इसके अलावाए उन्होंने राजस्थान को एक उद्यमी केंद्र के रूप में भी सराहा और लिखा कि भारत के कुछ महान उद्यमी राजस्थान से हैं। उनके व्यावसायिक कौशल ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है। श्री अग्रवाल ने अपने ट्वीट में इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी और आॅयल एण्ड गैस की भी सर्वाधिक संभावनाएं हैं। संसाधनों और ऊर्जा का यह शक्तिशाली संयोजन राजस्थान को भारत का नंबर एक राज्य बना सकता है। वेदांता समूह, हिन्दुस्तान जिं़क लिमिटेड और केयर्न ऑयल एंड गैस के माध्यम से, इस खनिज संपदा का जिम्मेदारी और सस्टेनेबल तरीके से खनन करने में प्रमुख उद्योग है। राजस्थान में वेदांता के बडे पैमाने पर संचालन ने प्रदेश को जिं़क, चांदी और आॅयल एण्ड गैस उत्पादन का वैश्विक केंद्र बना दिया है। राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बताते हुए, श्री अग्रवाल ने दोहराया कि वेदांता इस अद्भुत राज्य के लिए नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए राजस्थान और इसके नेतृत्व के सहयोग के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

जिंक गैल्वनाइजेशन ने भारत के लोटस टेंपल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, प्रधानमंत्री संग्रहालय, नौसेना भवन, यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, कतर के लुसैल स्टेडियम और दुबई के बुर्ज खलीफा और ब्लूवाटर आइलैंड जैसे प्रतिष्ठित स्थलों की संरचनात्मक अखंडता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिंक़ गैल्वनाइजेशन जंग से बचाव कर विरासत की रक्षा करने और भविष्य को मजबूत बनाने के लिए एक लागत प्रभावी, सस्टनेबल समाधान प्रदान करता है विश्व विरासत दिवस 2025 पर, विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिं़क उत्पादक कंपनी हिन्दुस्तान जिं़क लिमिटेड ने देश के बहुमूल्य स्मारकों के लिए अक्सर अनदेखे खतरे, जंग के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है। जंग, एक स्वभाविक लेकिन लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जो नमी, ऑक्सीजन, प्रदूषकों और लवणों के कारण होने वाली रासायनिक और विद्युत रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से धातुओं को धीरे धीरे कमजोर करती है। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गति और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ, जंग प्रमुख विनाशकारी शक्ति के रूप में उभर रही है, जो संरचनात्मक नुकसान को तेज करती है और सदियों की शिल्पकला को नष्ट कर देती है। इससे निपटने के लिए जिं़क सबसे प्रभावी और सस्टेनेबल समाधानों में से एक है। इसके सुरक्षात्मक गुण इसे जंग से बचाव में प्रमुख सहयोगी बनाते हैं। आमतौर पर ताजमहल या चारमीनार जैसी प्रसिद्ध पत्थर की संरचनाओं पर ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन इन स्मारकों में और उसके आस-पास मौजूद पुरानी धातु की संरचनाएँ जंग और क्षरण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। दिल्ली में अशोक स्तंभ, धातुकर्म उत्कृष्टता का प्राचीन चमत्कार है, जो लगातार तत्वों का सामना कर रहा है फिर भी मजबूत बना हुआ है। लेकिन विरासत स्थलों में अनगिनत अन्य लौह और इस्पात घटक इतने मजबूत नही हैं। औपनिवेशिक काल के लोहे के पुल जैसे कोलकाता का हावड़ा ब्रिज से लेकर विरासत उद्यानों और महलों में सजे हुए द्वार और रेलिंग तक, ये धातु तत्व अनियमित मौसम की स्थिति, नमी, औद्योगिक प्रदूषण और नमक युक्त हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण धीरे धीरे कमजोर हो रहे हैं। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में प्रति वर्ष जंग से होने वाला नुकसान लगभग 5 प्रतिशत है जो कि रोके जा सकने वाले नुकसानों में 100 बिलियन है। यह जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में काफी अधिक है, जहाँ जिं़क कोटेड स्टील के व्यापक उपयोग ने इस आंकड़े को 1.5 प्रतिशत से भी कम कर दिया है। जब विरासत संरचनाओं की बात आती है, तो नुकसान केवल आर्थिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक भी होता हैं, जो हमारे साझा इतिहास के अमूल्य अध्यायों को मिटा देता हैं। विश्व के कई समकालीन विरासत-प्रेरित स्थल और भविष्य के विरासत जैसे भारत के लोटस टेंपल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, प्रधानमंत्री संग्रहालय, यशोभूमि, कन्वेंशन संेटर और नौसेना भवन, कतर का लुसैल स्टेडियम और दुबई का बुर्ज खलीफा और ब्लूवाटर आइलैंड ने संरचनात्मक लंबी आयु सुनिश्चित करने के लिए जिंक गैल्वनाइजेशन को अपनाया है। जिंक-आधारित गैल्वनाइजेशन एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली तकनीक है, जो जंग और संरचनात्मक गिरावट से निपटने के लिए मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला समाधान प्रदान करती है। यह सरल, लागत प्रभावी तकनीक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है, जो बहाली और संरक्षण में उपयोग की जाने वाली धातु-आधारित सहायक संरचनाओं को 30-40 वर्षो का अतिरिक्त जीवन प्रदान करती है। इस वर्ष के विश्व धरोहर दिवस की थीम,आपदाओं और संघर्षों से खतरे में पड़ी धरोहर के अनुरूप, हिन्दुस्तान जिं़क का संदेश केवल धातु तक ही सीमित नहीं है। यह विरासत संरक्षण और आधुनिक बुनियादी ढांचे दोनों में जंग-रोधी सामग्रियों को एकीकृत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का मिशन है। ऐसे भारत का निर्माण करना महत्वपूर्ण है जहाँ हमारे अतीत पर गर्व और भविष्य की तैयारी एकसाथ हो। जिं़क, एक महत्वपूर्ण धातु है, जिसे लंबे समय से स्टील को जंग से बचाने की अपनी बेजोड़ क्षमता के लिए जाना जाता है। समय के साथ खराब होने वाली पारंपरिक कोटिंग्स के विपरीत, जिंक-गैल्वनाइज्ड संरचनाएं कैथोडिक सुरक्षा प्रदान करती हैं, जो प्रभावी रूप से जंग को रोकती हैं और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करती हैं। इसके अलावा, गैल्वनाइज्ड स्टील की बहुमुखी प्रतिभा और डिजाइन मजबूत अनुकूलन और कुशल निर्माण की अनुमति देता है, जिससे यह विभिन्न परियोजनाओं के लिए लागत प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प बन जाता है। जैसे-जैसे देश वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, सभी हितधारकों, सरकारी निकायों, संरक्षणवादियों, इंजीनियरों और उद्योगों  पर यह जिम्मेदारी है कि हम जो विरासत में मिले हैं, उसकी रक्षा करें। जिंक गैल्वनाइजेशन के साथ, हम न केवल जंग से लड़ते हैं बल्कि हम अपनी विरासत को भी संरक्षित करते हैं।

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